आधा गुलाब
जा रहा था राहों में,
तो पड़ा देखा एक गुलाब,
अभाव की बाँहों में,
बिखड़ा-टुटा आधा गुलाब.
कृशकाय से पथ पर,
आंसू भरे नेत्र लिए,
मेरे मानस पटल पर,
एक छवि अंकित करते हुए.
किसी ने होगा तोडा,
उसे असीम प्यार से,
पर अब है उसका दामन छोड़ा,
झूठे वादों-इकरार से.
कभी होगा वह शोभायमान
अपने तने की डंडियों पर,
लेकिन लिए अब टूटे अरमान,
गिरा पड़ा है पगडंडियों पर.
इसी आधे गुलाब की तरह,
टूटता है हर दिल का अरमान,
और छा जाती है उदासी,
नेत्रों में सूनापन और आंसू लिए.
ढेर सारा प्यार,
जीवितेश

1 comment:
jeevan ki saccai bade hi jeevant tarike se samjhaya hai aapne.Ye kavita jeevan ka matlab samjhati hai....
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